
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती: लालगंज में भाजपा नेता की दबंगई, बंद मकान का ताला तोड़ा; पुलिस की भूमिका पर सवाल
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)
- न्यायालय में विचाराधीन है मामला, फिर भी भाजपा नेता ने किया घर पर कब्जा!
- पुलिस चौकी के पास सरेआम कानून की उड़ी धज्जियां, वायरल वीडियो से मचा हड़कंप
- क्या यही है ‘सबका साथ-सबका विकास’? भाजपा नेता पर लगा घर हड़पने का आरोप
- सत्ता के रसूख के आगे बेबस लालगंज पुलिस: वीडियो वायरल होने के बाद भी नेता पर कार्रवाई नदारद
लालगंज, बस्ती। जनपद के लालगंज थाना क्षेत्र में सत्ता के रसूख का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ भाजपा के जिला मंत्री अमृतलाल वर्मा पर एक बंद मकान का ताला तोड़कर अवैध कब्जा करने का प्रयास करने का गंभीर आरोप लगा है। खास बात यह है कि जिस घर को निशाना बनाया गया, वह मामला पहले से ही न्यायालय में विचाराधीन है। इस घटना के बाद से इलाके में तनाव व्याप्त है और स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
ताला तोड़ते हुए वीडियो हुआ वायरल
घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें भाजपा जिला मंत्री अमृतलाल वर्मा को मकान का ताला तोड़ते हुए साफ देखा जा सकता है। सरेआम कानून को हाथ में लेते नेता के इस वीडियो ने क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। जहाँ एक ओर भाजपा ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा देती है, वहीं पार्टी के ही एक पदाधिकारी द्वारा की गई इस गुंडई ने संगठन की छवि पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस चौकी के पास ही घटना, साठगांठ का आरोप
पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि यह पूरी घटना लालगंज पुलिस चौकी से महज चंद कदमों की दूरी पर हुई, इसके बावजूद पुलिस मूकदर्शक बनी रही। पीड़ितों ने स्थानीय पुलिस और भाजपा नेता के बीच मिलीभगत (साठगांठ) का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सत्ताधारी दल के नेता होने के कारण पुलिस कार्रवाई करने से कतरा रही है, जबकि पीड़ित परिवार पूरी तरह से असुरक्षित महसूस कर रहा है।
उच्चाधिकारियों से न्याय की गुहार
न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के बावजूद दबंगई के बल पर कब्जा करने की कोशिश ने कानून व्यवस्था की पोल खोल दी है। पीड़ित पक्ष ने अब जिला प्रशासन और पुलिस के उच्चाधिकारियों से मामले में संज्ञान लेने, भाजपा नेता के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने और उन्हें न्याय दिलाने की गुहार लगाई है।
फिलहाल, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और आम लोगों के बीच बढ़ते आक्रोश के बाद पुलिस विभाग मामले की जांच का दावा कर रहा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या सत्ता के रसूख के सामने पुलिस पीड़ित को न्याय दिला पाएगी या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?





















